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Class 6th Online Course For English Medium CBSE Board Students
About Lesson

A Strange Wrestling Match Summary In English

Vijay Singh was a famous wrestler. But boasting was Vijay Singh’s weakness.
One day he was sitting in the market drinking milk. There were several youngmen surrounding him. Suddenly he boasted, “Why are people afraid of ghosts? I am not. I wish I met a stout ghost.

Thus, he declared his wish to meet a stout ghost. A person told him that ghosts roamed freely in the Haunted Desert. They looted and killed the travellers Vijay Singh felt scared. He felt that his boasting had pushed him into an awkward situation. Outwardly, he showed his disbelief in such fairy (false) tales.

 

Vijay Singh was told that the Haunted Desert was beyond an ugly black rock on the road to Jaisalmer. Vijay Singh made up his mind to find a ghost in the Haunted Desert. The entire village bade him farewell. An old woman handed him a small packet. Vijay Singh knew that the woman was very wise and not eccentric. Her gift, later on, helped him much to scare the ghost. Vijay Singh started walking. He reached the desert at sunset. It was a moonlit night. The ugly black rock was still a few miles ahead.

 

The night had advanced. Vijay Singh opened the old woman’s packet. It contained a lump of salt and an egg. Vijay Singh stepped into the Haunted Desert. He heard a voice calling him by his name. The voice named itself as his friend, Natwar. It told him that he would get lost in the Desert. Vijay Singh asked Natwar to come near him and show him the way. In fact-Vijay Singh wanted to size up his enemy. Every good wrestler does so before starting the fight.

 

The ghost appeared. Vijay Singh told the ghost that he had a great desire to meet him. He added that he was just a plain lying ghost. The ghost was taken aback at his insulting words. People generally started back in horror when they met him.

The ghost concluded that Vijay Singh was an unfeeling creature. He was ignorant of the reason why Vijay Singh desired to see him. Vijay Singh called him a stupid ghost. He could not even read other men’s thoughts.

Vijay Singh told the ghost that he wanted to fight a ghost. This made the ghost speechless. He could never think of a man who would challenge him to fight. The ghost sized him up. He said, “Vijay Singh, you don’t appear all that strong to me.” Vijay Singh told the ghost that he would show him his strength. Wishing to have a psychological victory on the ghost, he said that appearances are often deceptive.

A Strange Wrestling Match Summary In Hindi

विजय सिंह एक प्रसिद्ध पहलवान था। पर शेखी मारना, विजय सिंह की कमजोरी थी।
एक दिन वह बाजार में बैठा दूध पी रहा था। उसको घेरे कई नौजवान खड़े थे। अचानक उसने डींग मारी, ”लोग भूतों से क्यों डरते हैं ? मैं नहीं डरता। काश मुझे कोई ताकतवर भूत मिले !”

इस प्रकार, उसने किसी मजबूत भूत से मिलने की इच्छा व्यक्त की। एक व्यक्ति ने उसे बताया कि भूतहा मरुस्थल में भूत आजादी से घूमते हैं। वे यात्रियों को लूट लेते हैं और उनकी हत्या कर देते हैं। विजय सिंह भयभीत हो गया। उसे लगा कि उसकी शेखी ने उसे एक भद्दी परिस्थिति में पहुँचा दिया है। परन्तु बाहरी तौर पर उसने परियों वाली वैसी (झूठी) कहानियों में अविश्वास दिखाया।

 

विजय सिंह को बताया गया था कि जैसलमेर वाली सड़क पर, एक कुरूप काली चट्टान से परे भूतहा मरुस्थल है। विजय सिंह ने भूतहा मरुस्थल में जाकर भूत से मुलाकात करने का मन में संकल्प किया। समूचे गाँव ने उसे विदा किया। एक बूढी महिला ने उसे एक छोटा लिफाफा दिया। विजय सिंह जानता था कि वह औरत सनकी नहीं बल्कि बड़ी बुद्धिमान थी। उसके उपहार ने, बाद में उसे भूत को डराने में बड़ी मदद की। विजय सिंह ने चलना प्रारंभ किया। सूर्यास्त के समय वह मरुस्थल में पहुँच गया। चांदनी रात थी। कुरूप, काली चट्टान अभी भी कुछ मील की दूरी पर थी।

रात घनी (गहरी) हो चुकी थी। विजय सिंह ने बुढी महिला का लिफाफा खोला। उसमें नमक का एक ढेला और एक अण्डा था। विजय सिंह ने भूतहा मरुस्थल में कदम रखा। उसे एक आवाज सुनाई पड़ी जो उसे उसके नाम से पुकार रही थी। आवाज ने कहा कि वह उसका मित्र नटवर है। आवाज़ ने बताया कि वह मरुस्थल में गुम हो जाएगा। विजय सिंह ने नटवर से कहा कि उसके नजदीक आए और उसे मार्ग दिखाए। वास्तव में विजय सिंह अपने शत्रु का सही-सही अनुमान लगाना चाहता था। हर अच्छा पहलवान लड़ने से पहले ऐसा ही करता है।

भूत उपस्थित हो गया। विजय सिंह ने भूत से कहा कि उस (नटवर) से मिलने की उसकी (विजय सिंह की) बड़ी इच्छा थी। फिर उसने कहा कि वह तो सिर्फ एक सीधा सा झूठा भूत है। उसकी अपमानजनक बातों को सुनकर भूत दंग रह गया। प्रायः उसे देखकर लोग डर के मारे पीछे हट जाते थे।

भूत ने निष्कर्ष निकाला कि विजय सिंह भावनाहीन प्राणी था। उसे यह ज्ञान नहीं था कि विजय सिंह उससे मिलने के लिए क्यों लालायित था। विजय सिंह ने उसे एक मूर्ख भूत कहा। वह अन्य व्यक्तियों के विचारों को भी नहीं समझ सकता था।

विजय सिंह ने भूत को बताया कि किसी भूत से कुश्ती करने की उसकी उत्कट इच्छा है। इस बात ने भूत को अवाक् कर दिया। वह सोच भी नहीं सकता था कि कोई आदमी कभी उसे कुश्ती के लिए चुनौती देगा। भूत ने उसकी शक्ति का अनुमान लगाया। उसने कहा, “विजय सिंह, आप मुझे उतने तगड़े नजर नहीं आते हो।” विजय सिंह ने भूत को बताया कि वह, उसे अपनी शक्ति दिखा देगा। भूत पर मनोवैज्ञानिक विजय पाने के इरादे से उसने । कहा कि शकले प्रायः धोखा दे जाती हैं।

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