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Class 8th Science
Class 8 Social Science History
Online Class For 8th Standard Students (CBSE) (English Medium)
About Lesson

The Comet I Summary  In English


Dibya’s Magic Spell on Duttada
It was a moonless night in December. A cool breeze from the window disturbed the sleep of Indrani Debi. She was the wife of an amateur scientist, Duttada. She felt for the adjoining pillow. Duttada was not there. He was busy observing stars through his telescope, called Dibya Chakshu. He did not bother even to close the door. Nor did he put on a sweater to protect himself against the cold. Dibya had cast a magic spell on him.

Duttada’s Ambition of Life
Indrani Debi found Duttada looking through his telescope. To her the telescope was like a cunning woman who had ensnared her husband. It was his ambition to have enough money to buy a telescope. He also needed spare time to observe the stars. At retirement, he got both. Now Duttada spent long dark nights in observing stars.

Characteristics of a Comet
Duttada had a secret ambition to discover a new comet. Comets can be new as they come from the distant corners of the solar system. Like planets, they orbit round the sun. When a comet comes near the sun, its longish tail shines in the sunlight. Then it disappears for many years.

Duttada’s Optimism
Duttada was optimistic about the discovery of a new comet. The reason was that professional astronomers were more interested in galaxies. In fact, amateur astronomers often discovered new comets which professionals had missed.

Duttada’s Discovery
Duttada thought that that night was going to be a big night. The reason was that he had seen something faint behind the ‘same old stars’. He made some calculations on his calculator. There was no mistake. It was a new comet.

News in ‘Ananda Bazar Patrika’
News about Duttada’s discovery was published in the ‘Ananda Bazar Patrika’. It was reported that Duttada had discovered a new comet. He had informed the Indian Institute of Astrophysics, Bangalore about its location. Duttada claimed that the comet could clearly be seen in the next few months. He used his eight-inch telescope, Dibya Chakshu to make this discovery. The IIA confirmed the discovery. It was named Comet Dutta.

Problems of Duttada
Duttada was an introvert. He felt disgusted with the many receptions and functions which he had to attend. He wished not to have made this discovery. Indrani Debi also agreed with him. He asked why she wanted so. She said that comets bring bad luck. So she did not want Duttada to have made this discovery.

Duttada’s Explanation
Indrani Debi was an M.A. So Duttada was surprised at his being superstitious. He told her that the arrival of a comet had nothing to do with calamities on the earth. There is nothing harmful about them. Duttada assured her that his comet will do no harm to anybody. However, he was not fully confident.


King’s College, Cambridge
In King’s College, Cambridge, the butler gave an envelope to the Provost. The Provost called James, an astronomer, and gave him the envelope. When James opened the envelope, it had a brief note. It was sent by John Macpherson. He wanted him to come to his office in London that very night. He told him to keep his visit strictly confidential. It was a note from Defence Science Advisor.

Visit to Whitehall
Johnson, security officer at Whitehall, had come to take James to London. Soon his car brought them to Whitehall. They soon reached the office of Sir John Macpherson. Johnson introduced James to Sir John and went out. Sir John gave him a typescript. It was meant to be published in ‘Nature’. James was surprised to see the original manuscript in his hand. He asked him how he had got it.

Sir John’s Explanation
Sir John told him that Taylor, the editor of ‘Nature’, was his friend. But James said that he had asked ‘Nature’ to publish it without delay. Since it was important, it should not be published in this hurry. In fact, Taylor had asked Sir John’s opinion about the manuscript before publishing it. That was why, it was in his hand now.

Possibility of Catastrophe
James had predicted that Comet Dutta would collide with the earth. This would be a great catastrophe. He told Sir John that he had made his calculations very carefully. Except for some rare circumstances, the collision would take place certainly. But Sir John asked what those circumstances were. James said that it might collide with some asteroid. Secondly, it might break up or evaporate near the sun.

How to stop collision
Sir John said that they should stop this collision. It is going to happen in a year. In fact, ten months, to be exact. So living beings have only ten months to survive. But James asked him how they could prevent that natural catastrophe. Sir John suggested that they should call a meeting of experts. They should maintain total secrecy. Otherwise there would be panic in the world.

Sir John’s Suggestion
Sir John suggested that James should tone down the paper. He should show the conclusion appear not so certain. He will request friends in other countries to use restraint for sometime. This would be done till the comet was safe. He asked James if they should call an International Conference within a week’s time. James thought that it was an impossible task. But Sir John began to make preparations.

The Comet I Summary  In Hindi


दिब्या का दत्तादा पर जादुई असर
दिसम्बर में अमावस्या की एक रात थी। खिड़की से चल रही ठंडी हवा ने इन्द्राणी देवी की नींद खराब कर दी। वह एक शौकिया वैज्ञानिक दत्तादा की पत्नी थी। उसने पास के तकिए को हाथ से छुआ। दत्तादा वहाँ नहीं थे। वह दिब्य चक्षु नाम की अपनी दूरबीन से सितारे देख रहा था। उसने न दरवाजा बन्द करने की चिन्ता की। न ही अपने आप को ठंड से बचाने के लिए अपना स्वेटर पहना। दिव्या ने उस पर जादुई असर कर दिया था।

दत्तादा के जीवन की महत्त्वाकांक्षा
इन्द्राणी देवी ने दत्तादा को दूरबीन से देखते हुए पाया। उसके लिए दूरबीन एक चालाक औरत की तरह थी जिसने उसके पति को फाँस लिया था। दत्तादा की यह महत्त्वाकांक्षा थी कि उसके पास दूरबीन खरीदने के लिए काफी पैसा हो। यह भी आवश्यक था कि सितारे देखने के लिए उसके पास फालतू समय हो। सेवामुक्त होने पर उसको दोनों मिल गए। अब दत्तादा लम्बी अन्धेरी रातें सितारे देखने में बिताते थे।

धूमकेतु की विशेषताएँ
दत्तादा में एक छिपी हुई महत्त्वाकांक्षा थी कि वह एक नया धूमकेतु खोजें। धूमकेतु नए हो सकते हैं क्योंकि वे सौरमंडल के दूर दराज कोनों से आते हैं। नक्षत्रों की तरह वे सूर्य का चक्कर लगाते हैं। जब एक धूमकेतु सूर्य के समीप आता है तो इसकी लम्बी सी पूँछ सूर्य की रोशनी में चमकती है। फिर काफी सालों तक वह नजर नहीं आता है।

दत्तादा का आशावाद
दत्तादा एक नए धूमकेतु की खोज के बारे में आशान्वित थे। कारण यह था कि पेशेवर खगोलशास्त्री आकाश गंगाओं में ज्यादा दिलचस्पी लेते थे। वास्तव में जो धूमकेतु पेशेवर खगोल शास्त्रियों को नहीं मिलते उनको शौकिया खगोलशास्त्री खोज लेते थे।

दत्तादा की खोज
दत्तादा ने सोचा कि वह रात एक महत्त्वपूर्ण रात होगी। कारण यह था कि उसे ‘उन्हीं पुराने सितारों के पीछे हल्की सी कोई एक चीज नजर आई थी। उसने अपने गणक पर हिसाब लगाया। उसने कोई गलती नहीं की थी। वह एक नया धूमकेतु ही था।

‘आनन्द बाजार पत्रिका’ में खबर
दत्तादा की खोज की खबर ‘ आनन्द बाजार पत्रिका में प्रकाशित हुई। यह रिपोर्ट किया गया कि दत्तादा ने नया धूमकेतु खोजा था। उसकी स्थिति के बारे में उसने बैंगलोर के Indian Institute of Astrophysics को सूचित कर दिया था। दत्तादा ने दावा किया कि धूमकेतु को अगले कुछ महीनों में साफ-साफ देखा जा सकता था। उसने अपनी 8-इंच की दूरबीन, दिब्य चक्षु का इस खोज के लिए उपयोग किया। IIA ने खोज की पुष्टि कर दी। इसका नाम ‘धूमकेतु दत्ता’ रखा गया।

दत्तादा की समस्याएँ
दत्तादा, एक अन्तर्मुखी था। उसके लिए जो बहुत से स्वागत समारोह और उत्सव किए गए उनसे उसका मन ऊब गया। वह चाहने लगा कि अच्छा होता वह यह खोज न करता। इन्द्राणी देवी भी उसके साथ सहमत थी। उसने पूछा वह ऐसा क्यों चाहती थी। उसने जवाब दिया कि धूमकेतु बुरा भाग्य लाते हैं। इसलिए वह नहीं चाहती थी कि दत्तादा यह खोज करते।

दत्तादा को स्पष्टीकरण
इन्द्राणी देवी एम.ए. पास थी। इसलिए दत्तादा को उसके अन्धविश्वासी होने पर आश्चर्य हुआ। उसने उसे बताया कि धूमकेतुओं के आने से जमीन पर कोई दुर्घटना नहीं होती है। उनसे कोई हानि नहीं होती। दत्तादा ने उसे विश्वास दिलवाया कि उसका धूमकेतु किसी को नुकसान नहीं पहुँचायेगा। हालाँकि वह पूर्ण रूप से आश्वस्त नहीं था।


किंग्स कॉलेज, कैम्ब्रिज
Kings College में खानसामे ने अध्यक्ष को एक लिफाफा दिया। अध्यक्ष ने James नाम के खगोलशास्त्री को बुलाया और लिफाफा दे दिया। जब James ने लिफाफा खोला तो उसमें एक संक्षिप्त पत्र था। यह John Macpherson द्वारा भेजा गया था। वे उससे उसी रात अपने दफ्तर लन्दन में मिलना चाहते थे। उसने उनको अपना आना बिलकुल गुप्त रखने के लिए कहा। यह पत्र Defence Science Advisor से था।

Whitehall में मुलाकात
whitehall का सुरक्षा अधिकारी Johnson, James को London ले जाने के लिए आया था। जल्दी ही उसकी गाड़ी उनको whitehall ले आई। वे जल्दी ही Sir John Macpherson के दफ्तर पहुँच गए। Johnson ने James का Sir John से परिचय करवाया और वहाँ से चला गया। Sir John ने उसे टाइप किया हुआ लेख दिया। यह Nature’ में छापने के लिए था। James को उनके हाथ में मौलिक हस्तलिपि देखकर आश्चर्य हुआ। उसने उससे पूछा उसे यह कैसे मिला।

Sir John का स्पष्टीकरण
Sir John ने बताया कि ‘Nature’ का सम्पादक Taylor उनका दोस्त था। परन्तु James ने कहा कि उसने तो ‘Nature को बगैर देरी के छापने को कहा था। चूँकि यह लेख महत्त्वपूर्ण था इसलिए उसे ऐसी जल्दी में छपना नहीं चाहिए था। वास्तव में Taylor ने छापने से पहले इस लेख पर Sir John के विचार देने के लिए कहा था। इसीलिए अब वह उसके पास था।

दुर्घटना की सम्भावना
James ने भविष्यवाणी की थी कि धूमकेतु दत्ता’ जमीन से टकराएगा। यह एक बड़ी दुर्घटना होगी। उसने Sir John को बताया कि उसने अपना हिसाब बहुत सावधानी से लगाया था। कुछ असाधारण हालात को छोड़कर टकराव निश्चित रूप से होगा। परन्तु Sir John ने पूछा वे हालात क्या होंगे। उसने कहा यह किसी Asteroid से टकरा सकता है। दूसरे, यह सूर्य के पास टुकड़े-टुकड़े । हो सकता है या वाष्प बनकर गायब हो सकता है।

टकराव को कैसे रोका जाए।
Sir John ने कहा कि उन्हें टकराव रोकना चाहिए। यह एक साल में होने वाला है। दरअसल ठीक 10 महीनों में। इस तरह प्राणियों के पास जीवित रहने के लिए केवल दस महीने बचे हैं। परन्तु James ने उससे पूछा कि वे उस प्राकृतिक दुर्घटना को कैसे रोक सकते हैं। Sir John ने सुझाव दिया कि इस पर विचार करने के लिए उनको विशेषज्ञ बुलाने चाहिएँ। उनको पूरी गोपनीयता बनाए रखनी चाहिए। वरना तो संसार में तहलका मच जाएगा।

Sir John का सुझाव
Sir John ने सुझाव दिया कि James अपने लेख को हल्का कर दे। उसे परिणाम इतना निश्चित नहीं दिखाना चाहिए। वह दूसरे देशों में भी दोस्तों को कुछ समय के लिए नियन्त्रण के लिए कहेगा। यह तब तक किया जाएगा जब तक धूमकेतु सुरक्षित नहीं हो जाता। उसने James से पूछा कि क्या वे एक सप्ताह में अन्तर्राष्ट्रीय गोष्ठी बुला लेंगे। James ने सोचा कि यह एक असम्भव काम था। परन्तु Sir John तैयारी करने लग गए।

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